बिहार ज़मीन रेजिस्ट्री से जुड़ा नया अपडेट, जिसमें सभी कागजात डिजिटल होंगे। पुराने और नए जमीन रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट्स को ऑनलाइन निकालने की सुविधा।

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बिहार ज़मीन रेजिस्ट्री से जुड़ा बड़ा फैसला सरकार की ओर से लिया गया है। सभी रजिस्ट्री के कागजात अब डिजिटल किए जाएंगे। जो पुराने समय से कागजात फाइलों में बंद हैं और खराब हो रहे थे, उन्हें अब ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा। इस प्रक्रिया से न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकारी दस्तावेज़ सुरक्षित भी रहेंगे।

निबंधन विभाग ने कहा है कि 1796 में शुरू हुई ज़मीन रेजिस्ट्री प्रक्रिया के सभी दस्तावेज़ डिजिटली संरक्षित किए जाएंगे। अब तक 137 रजिस्ट्री कार्यालयों में रखे गए 300 साल पुराने कागजात खराब हो चुके हैं। सरकार ने इस बात को ध्यान में रखते हुए डिजिटलाइजेशन का निर्णय लिया है।

राज्य में जितने भी रजिस्ट्री कार्यालय हैं, उनके दस्तावेजों को डिजिटल रूप में सुरक्षित रखने के लिए प्रक्रिया तेज़ी से शुरू की जाएगी। सभी नए और पुराने कागजात को स्कैन करके एक केंद्रीय ऑनलाइन सिस्टम पर डाला जाएगा। इस प्रक्रिया से बिहार के हर नागरिक को अपने ज़मीन के कागजात ऑनलाइन निकालने में सुविधा होगी।

बिहार ज़मीन रेजिस्ट्री में डिजिटलाइजेशन का उद्देश्य
निबंधन विभाग का कहना है कि डिजिटलाइजेशन से कागजात की सुरक्षा सुनिश्चित होगी। अब किसी को रजिस्ट्री कार्यालय के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि हर नागरिक आसानी से अपने दस्तावेज़ को डाउनलोड कर सके।

पुराने समय में जिन कागजातों का रिकॉर्ड नहीं मिल रहा था, अब वे सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध होंगे। डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद, सभी नागरिक अपना जमीन का सर्टिफाइड कॉपी भी ऑनलाइन प्राप्त कर सकेंगे।

डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया में समय और कठिनाइयाँ
यह प्रक्रिया आसान नहीं है। पुराने कागजात को डिजिटल रूप में संरक्षित करना एक लंबा और कठिन कार्य है। सरकार ने बताया कि इस प्रक्रिया को पूरा करने में 2-3 महीने या उससे ज्यादा समय लग सकता है।

कागजात को स्कैन करने और उन्हें सिस्टम में अपलोड करने में तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। हालांकि, एक बार यह प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, लोगों को काफी सुविधा मिलेगी।

निबंधन कार्यालयों का सर्वेक्षण और सुधार
हाल ही में निबंधन विभाग के अधिकारियों ने कई रजिस्ट्री कार्यालयों का दौरा किया। उन्होंने देखा कि पुराने कागजात की हालत कैसी है और डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया में कितना समय लग सकता है। इसके आधार पर, एजेंसी का चयन किया जा रहा है जो इस प्रक्रिया को लागू करेगी।

पुराने और नए कागजात की सुरक्षा
राज्य के सभी जिलों में जितने भी रजिस्ट्री कार्यालय हैं, उन सभी में रखे कागजात को डिजिटल रूप से सुरक्षित किया जाएगा। पुराने कागजात जिन्हें संरक्षित करना मुश्किल था, अब ऑनलाइन उपलब्ध होंगे।

सवाल और जवाब:

सवाल 1: क्या पुराने कागजात ऑनलाइन उपलब्ध होंगे?
हाँ, बिहार सरकार ने सभी पुराने और नए ज़मीन रजिस्ट्री कागजात को ऑनलाइन उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है।

सवाल 2: इस प्रक्रिया में कितना समय लगेगा?
डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया को पूरा करने में 2-3 महीने या उससे अधिक समय लग सकता है।

सवाल 3: क्या डिजिटल कागजात का उपयोग कानूनी रूप से किया जा सकता है?
हाँ, डिजिटल कागजात की सर्टिफाइड कॉपी को कानूनी प्रक्रिया में उपयोग किया जा सकेगा।

सवाल 4: अगर दस्तावेज़ खो जाए तो क्या होगा?
एक बार डिजिटलाइजेशन प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद, सभी दस्तावेज़ ऑनलाइन उपलब्ध होंगे, और खोने का कोई डर नहीं रहेगा।

सवाल 5: क्या यह सुविधा मुफ्त होगी?
सरकार ने इस सुविधा को लागू करने के लिए शुल्क संरचना के बारे में कोई जानकारी नहीं दी है, लेकिन ऑनलाइन प्रक्रिया में सामान्य शुल्क लागू हो सकता है।

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