अगर आपकी जमीन का पुराना केवाला कहीं खो गया है या रजिस्ट्री का दस्तावेज़ घर पर नहीं मिल रहा है, तो टेंशन मत लीजिए। बिहार में kewala ki nakal kaise nikale bihar का सीधा जवाब है, सरकार के भूमि जानकारी पोर्टल से आप केवाले की प्रमाणित प्रति (Certified Copy) ऑनलाइन निकाल सकते हैं, या फिर अपने जिले के रजिस्ट्री ऑफिस जाकर भी ले सकते हैं। चलिए पहले समझते हैं कि केवाला आखिर है क्या और जमाबंदी से यह कैसे अलग है, क्योंकि यहीं पर सबसे ज्यादा कंफ्यूजन होता है।
केवाला क्या होता है।
जमीन खरीदने या बेचने के बाद रजिस्ट्री ऑफिस (निबंधन कार्यालय) में जो दस्तावेज़ रजिस्टर्ड किया जाता है, उसी को केवाला या Sale Deed कहते हैं। आसान भाषा में कहें तो केवाला इस बात का कानूनी सबूत है कि यह जमीन किसने, किससे, कब और कितने में खरीदी। दाखिल-खारिज, लगान की रसीद कटवाना, LPC बनवाना या बैंक से लोन लेना, हर काम की नींव यही केवाला होता है।
ध्यान देने वाली बात यह है कि जमीन का मालिकाना हक सबसे मजबूत सबूत केवाले से ही मिलता है। अगर आपके पास केवाला नहीं है, तो आप जमाबंदी दिखाकर जमीन बेच नहीं सकते। जमीन खरीदने से पहले केवाले की जांच करना सबसे जरूरी कदम है, इसमें खाता, खेसरा, रकबा, चौहद्दी और विक्रेता का नाम सही-सही देख लें।
केवाले की नकल कब-कब काम आती है।
असली केवाला खो जाए, आग या बाढ़ में खराब हो जाए, या दादा-परदादा के समय की रजिस्ट्री का कागज ही घर में न हो, तब नकल ही काम आती है। बैंक से जमीन पर लोन लेना हो, दाखिल-खारिज कराना हो, जमीन बेचनी हो या कोर्ट में अपना हक साबित करना हो, हर जगह केवाले की प्रमाणित प्रति मांगी जाती है। बिहार में चल रहे भूमि सर्वे के दौरान भी पुराने केवाले सबसे अहम दस्तावेज़ों में गिने जा रहे हैं, इसलिए अभी से नकल निकलवाकर रख लेना समझदारी है।
केवाला vs जमाबंदी: सबसे बड़ी उलझन।
गांव-देहात में लोग अक्सर केवाला और जमाबंदी को एक ही चीज समझ लेते हैं, जबकि दोनों बिल्कुल अलग कागज़ हैं। केवाला बिक्री का दस्तावेज़ है, जो रजिस्ट्री ऑफिस में बनता है। जमाबंदी खातेदार का रजिस्टर है, जो अंचल कार्यालय (राजस्व विभाग) में बनता है और जिसमें लिखा होता है कि फिलहाल जमीन किसके नाम पर चढ़ी है और लगान कौन दे रहा है।
सिस्टम यूं चलता है, जमीन खरीदी गई तो पहले केवाला रजिस्टर हुआ, फिर उसी केवाले के आधार पर दाखिल-खारिज (Mutation) हुआ, और तब जाकर जमाबंदी में खरीदार का नाम चढ़ा। मतलब केवाला जड़ है और जमाबंदी उसकी शाखा। अगर केवाला है लेकिन जमाबंदी में नाम नहीं चढ़ा, तो बिहार स्पेशल सर्वे में वंशावली अपलोड और दाखिल-खारिज से जुड़ी जानकारी पहले जरूर समझ लें।
आसान टेबल में समझिए।
| बिंदु | केवाला | जमाबंदी |
| क्या है | बिक्री का रजिस्टर्ड दस्तावेज़ (Sale Deed) | खातेदार का सरकारी रजिस्टर |
| कहां बनता है | रजिस्ट्री ऑफिस (निबंधन कार्यालय) | अंचल कार्यालय (राजस्व विभाग) |
| क्या साबित करता है | जमीन किसने किससे खरीदी | फिलहाल जमीन किसके नाम पर है |
| बदलता कब है | नई बिक्री या रजिस्ट्री पर | दाखिल-खारिज होने पर |
केवाला की नकल ऑनलाइन कैसे निकालें।
बिहार सरकार ने पुराने से पुराने रजिस्ट्री दस्तावेज़ डिजिटाइज कर दिए हैं, 2005 से पहले का पुराना केवाला, 2006 से 2016 तक का रजिस्ट्री रिकॉर्ड और 2016 के बाद की ऑनलाइन रजिस्ट्री, सब घर बैठे PDF में मिल जाता है। स्टेप बाय स्टेप तरीका नीचे है।
स्टेप 1: भूमि जानकारी पोर्टल खोलें। ब्राउज़र में bhumijankari.bihar.gov.in खोलिए। स्टेप 2: रजिस्ट्रेशन करें। अगर पहली बार आए हैं तो New User Sign Up पर क्लिक करके नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल और पासवर्ड भरें, मोबाइल पर आए OTP से वेरिफाई करें। स्टेप 3: लॉगिन करके Certified Copy सेक्शन में जाएं। स्टेप 4: जमीन की जानकारी भरें, रजिस्ट्री ऑफिस, सर्किल, मौजा, खाता नंबर, खेसरा नंबर, क्रेता या विक्रेता का नाम और डीीड नंबर (जितना पता हो उतना भरें)। स्टेप 5: Search पर क्लिक करें, सही रिकॉर्ड चुनकर View Details दबाएं। स्टेप 6: Make Payment पर क्लिक करके शुल्क (लगभग ₹600 प्रति दस्तावेज़) UPI, डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से जमा करें। स्टेप 7: फिर से लॉगिन करके Download Copy पर क्लिक करें। आपकी प्रमाणित केवाला PDF डाउनलोड हो जाएगी।
एक जरूरी टिप, पेमेंट के बाद पोर्टल से ऑटो लॉगआउट होना सामान्य है, घबराइए नहीं। दोबारा लॉगिन करके Track Document या Download Copy सेक्शन में जाइए, आपकी PDF वहीं मिल जाएगी। बहुत पुराने केवाले (2005 से पहले वाले) में सर्च के लिए रजिस्ट्री का अनुमानित साल और पुराना मौजा या थाना नाम काम आता है, इसलिए घर के बुजुर्गों से यह जानकारी पहले ही पूछकर रख लें।
यह सरकारी प्रमाणित प्रति (Certified Copy) होती है, जो कोर्ट, बैंक और कलेक्टरेट, हर जगह मान्य है। बिहार में रजिस्ट्री की नई व्यवस्था के बारे में जानना हो तो बिहार में पेपरलेस रजिस्ट्री (e-vaulting) कैसे काम करती है जरूर पढ़ें।
रजिस्ट्री ऑफिस से ऑफलाइन नकल कैसे मिलेगी।
अगर ऑनलाइन काम नहीं हो पा रहा, तो आप जिस रजिस्ट्री ऑफिस में जमीन की रजिस्ट्री हुई थी, वहीं जाकर नकल के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन में जमीन का खाता, खेसरा, मौजा और रजिस्ट्री की अनुमानित तारीख लिखनी होती है। ऑफिस के रिकॉर्ड रूम से संबंधित बही ढूंढकर आपको नकल की प्रति दी जाती है। ध्यान रहे, पुरानी बही खोजने में कुछ दिन का समय लग सकता है, इसलिए डीीड नंबर या रजिस्ट्री की तारीख पता हो तो काम बहुत जल्दी होता है।
ऑफलाइन आवेदन में यह रखें ध्यान।
आवेदन सादे कागज पर लिखकर रजिस्ट्री ऑफिस के संबंधित क्लर्क या अधिकारी को दें, उसमें विक्रेता और क्रेता का नाम, जमीन का मौजा, खाता, खेसरा और रजिस्ट्री की अनुमानित तारीख साफ-साफ लिखें। साथ में अपना आधार कार्ड और मोबाइल नंबर जरूर दें ताकि नकल तैयार होने पर सूचना मिल सके। किसी दलाल को पैसा देने की जरूरत नहीं है, यह पूरी तरह सरकारी प्रक्रिया है और शुल्क भी रसीद के साथ वसूला जाता है।
नकल निकालने के लिए जरूरी जानकारी और दस्तावेज़।
ऑनलाइन या ऑफलाइन, केवाले की नकल के लिए ये जानकारी तैयार रखिए, जिला और रजिस्ट्री ऑफिस का नाम, सर्किल (अंचल), मौजा (गांव), खाता नंबर, खेसरा या प्लॉट नंबर, क्रेता या विक्रेता का नाम, डीीड नंबर या रजिस्ट्री की तारीख। खोजने वाले के पास आधार कार्ड और मोबाइल नंबर होना चाहिए, क्योंकि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन OTP से ही होता है।
खाता या खेसरा नंबर कहां से मिलेगा।
अगर आपको खाता या खेसरा नंबर ही नहीं पता, तो पहले जमीन की लगान रसीद देखिए, उसमें खाता, खेसरा और जमाबंदी नंबर लिखा होता है। रसीद भी न हो तो बिहार भूमि पोर्टल (biharbhumi.bihar.gov.in) पर अपने मौजा की जमाबंदी देखकर खाता-खेसरा पता किया जा सकता है। बुजुर्गों से पूछने पर रजिस्ट्री का साल या विक्रेता का नाम मिल जाए तो सर्च और आसान हो जाता है।
केवाले में क्या-क्या लिखा होता है।
केवाला पढ़ना आ जाए तो जमीन के आधे विवाद वहीं सुलझ जाते हैं। इसमें क्रेता और विक्रेता का पूरा नाम और पता, जमीन का खाता नंबर और खेसरा नंबर, कुल रकबा (क्षेत्रफल), जमीन की चौहद्दी यानी चारों दिशाओं की सीमा, जमीन किस मौजा, थाना और जिले में है, बिक्री की कीमत और रजिस्ट्री की तारीख, दस्तावेज़ संख्या और गवाहों के हस्ताक्षर होते हैं।
केवाला जांचते समय इन बातों का रखें ध्यान।
नकल मिलते ही सबसे पहले यह देखिए कि विक्रेता का नाम और जमाबंदी में चढ़ा नाम एक जैसा है या नहीं। खाता और खेसरा नंबर जमीन की रसीद से मिलाकर देखिए। चौहद्दी से यह साफ होता है कि जमीन की असली लोकेशन कहां है। हाल के दिनों में फर्जी केवाले के मामले भी सामने आए हैं, इसलिए सिर्फ केवाला देखकर फैसला न करें, जमाबंदी, दाखिल-खारिज और लगान की रसीद भी साथ में जांच लें। शक हो तो रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड से मिलान जरूर करवाएं।
शुल्क और समय।
पोर्टल पर केवाले की प्रमाणित प्रति का शुल्क लगभग ₹600 प्रति दस्तावेज़ है (पोर्टल पर दिखे शुल्क के अनुसार)। पेमेंट के तुरंत बाद या कुछ ही मिनटों में PDF डाउनलोड के लिए तैयार हो जाती है। ऑफलाइन आवेदन में शुल्क निबंधन विभाग के नियमानुसार लगता है और नकल मिलने में कुछ दिन लग सकते हैं। ऊपर बताए गए तरीकों से kewala ki nakal kaise nikale bihar सवाल का पूरा जवाब आपको मिल गया होगा, अब फैसला सिर्फ इतना करना है कि ऑनलाइन निकालना है या रजिस्ट्री ऑफिस जाकर।
Quick Links।
| भूमि जानकारी पोर्टल | केवाला नकल डाउनलोड पोर्टल खोलें |
| वंशावली और सर्वे | बिहार स्पेशल सर्वे में वंशावली अपलोड कैसे करें |
| पेपरलेस रजिस्ट्री | बिहार पेपरलेस रजिस्ट्री e-vaulting गाइड |
| बिहार भूमि पोर्टल | बिहार भूमि आधिकारिक वेबसाइट |
| Bhu Lagan Rasid | Bhu Lagan Rasid Kaise Nikale Bihar |
Sawal 1: केवाला क्या होता है?
केवाला जमीन की खरीद-बिक्री का रजिस्टर्ड दस्तावेज़ (Sale Deed) है, जो रजिस्ट्री ऑफिस में रजिस्टर होता है। यह जमीन के मालिकाना हक का सबसे मजबूत कानूनी सबूत है।
Sawal 2: क्या 2005 से पहले का पुराना केवाला ऑनलाइन मिल जाएगा?
हां। बिहार सरकार ने प्री-कंप्यूटराइजेशन दौर के पुराने केवाले भी डिजिटाइज कर दिए हैं। भूमि जानकारी पोर्टल पर प्री-कंप्यूटराइजेशन सर्च से दादा-परदादा के समय की रजिस्ट्री भी मिल सकती है, बशर्ते खाता, खेसरा या मौजा की जानकारी हो।
Sawal 3: अगर डीीड नंबर न पता हो तो kewala ki nakal kaise nikale bihar?
डीीड नंबर न पता हो तब भी नकल निकल सकती है। पोर्टल पर खाता नंबर, खेसरा नंबर, मौजा, क्रेता या विक्रेता का नाम और रजिस्ट्री का अनुमानित साल भरकर सर्च करें। जितनी जानकारी देंगे, रिकॉर्ड उतनी जल्दी मिलेगा।
Sawal 4: क्या केवाले की ऑनलाइन नकल बैंक और कोर्ट में मान्य है?
हां, पूरी तरह मान्य है। पोर्टल से मिलने वाली PDF सरकारी प्रमाणित प्रति (Certified Copy) होती है, जिसे कोर्ट, बैंक और कलेक्टरेट सभी जगह स्वीकार किया जाता है।
Sawal 5: क्या सिर्फ जमाबंदी से जमीन बेची जा सकती है?
नहीं। जमाबंदी सिर्फ यह बताती है कि फिलहाल नाम किसका चढ़ा है। जमीन बेचने के लिए केवाला (रजिस्ट्री दस्तावेज़) जरूरी है। केवाले के बिना किया गया सौदा कानूनी रूप से कमजोर होता है।
Sawal 6: केवाले की नकल निकालने की फीस कितनी है?
ऑनलाइन पोर्टल पर लगभग ₹600 प्रति दस्तावेज़ शुल्क है। ऑफलाइन रजिस्ट्री ऑफिस में शुल्क निबंधन विभाग के नियमानुसार अलग से लगता है।
ऐसी ही जमीन और सर्टिफिकेट से जुड़ी नई जानकारी सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल और Telegram ग्रुप से जुड़ जाइए। नीचे दिए गए Join बटन पर क्लिक करते ही आपको हर नया आर्टिकल सीधे मिल जाएगा।
Lekhak ke baare me: BiharRtps.in की टीम बिहार के जमीन रिकॉर्ड, सर्टिफिकेट और सरकारी योजनाओं पर आसान भाषा में गाइड लिखती है, ताकि आपको दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।












