Bihar Crime Update: औरंगाबाद जिले के हसपुरा थाना क्षेत्र से एक दिल दहला देने वाली और रहस्यमयी घटना सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। अमझर शरीफ पंचायत के सैदपुर (मोती बिगहा) गांव में पांच महादलित नाबालिग किशोरियों ने एक साथ जहरीला पदार्थ का सेवन किया। इस दर्दनाक घटना में चार किशोरियों की मौत हो गई, जबकि एक का अभी भी इलाज चल रहा है। गांव और आसपास के इलाकों में सिर्फ एक सवाल गूंज रहा है – आखिर इन पांच नाबालिग लड़कियों ने एक साथ मौत को क्यों गले लगा लिया?
पइन और तालाब के पास हुई घटना
एक ग्रामीण महिला (नाम न छापने की शर्त पर) ने बताया कि यह घटना जमाल बिगहा जाने वाली सड़क के किनारे, पइन के पेड़ और तालाब के पास हुई। उनके मुताबिक, पांचों किशोरियां वहां बैठ गईं और एक साथ जहर खा लिया। जहर खाने के बाद, एक लड़की किसी तरह अपने घर पहुंचने में कामयाब रही और घरवालों को सारी बात बता दी। परिवार वालों ने तुरंत उसका इलाज शुरू कराया, जिससे उसकी जान बच गई। वह फिलहाल इलाजरत है। हालांकि, बाकी की चार किशोरियां पास के गेहूं के खेत में चली गईं, जहां तड़प-तड़प कर उनकी मौत हो गई।
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गुरुवार की घटना, शनिवार को बाहर आई बात
यह पूरा मामला गुरुवार को हुआ था, लेकिन इसकी जानकारी शनिवार को सार्वजनिक हुई, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया। खबर मिलने के बाद, हमारी टीम गांव पहुंची और सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक पूरे गांव का दौरा किया।
हर तरफ सिर्फ एक ही माहौल था – डर, सन्नाटा और खामोशी। लोग घटना की पुष्टि तो कर रहे थे, लेकिन कोई भी खुलकर बात करने को तैयार नहीं था।
‘सर, नाम मत लिखिए…’
गांव के एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “सर, नाम मत लिखिए… चारों बच्चियों के शव एक साथ मोती बिगहा श्मशान घाट पर जला दिए गए।” इस जानकारी के बाद टीम ने श्मशान घाट का निरीक्षण किया, जहां हाल ही में शव जलाने के साफ निशान मिले। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस के डर से परिवार वालों ने चारों शवों का एक साथ ही अंतिम संस्कार कर दिया, ताकि मामला बाहर न जाए।
पुलिस की जानकारी पर सवाल
जब इस पूरे मामले में पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया गया, तो उन्होंने घटना के बारे में कोई जानकारी न होने की बात कही। पुलिस का कहना है कि गांव में चौकीदार को भेजा गया था, लेकिन किसी भी ग्रामीण ने कुछ बताने से इनकार कर दिया। हालांकि, पड़ताल में यह बात सामने आई कि चौकीदार गुरुवार को ही गांव गया था, उस वक्त चारों शव गांव में ही मौजूद थे। इसके बावजूद जानकारी ऊपर तक क्यों नहीं पहुंची? यह एक बड़ा सवाल बना हुआ है।
आखिर क्यों उठाया इतना बड़ा कदम?
घटना सामने आने के बाद हसपुरा, गोह और आसपास के इलाकों में चर्चाओं का दौर जारी है। लोग तरह-तरह की आशंकाएं जता रहे हैं – क्या बच्चियों पर किसी तरह का दबाव था? क्या वे किसी डर, प्रताड़ना या सामाजिक वजह से परेशान थीं? क्या कोई ब्लैकमेलिंग या मानसिक उत्पीड़न का मामला था? फिलहाल, इन सभी सवालों के जवाब अंधेरे में हैं।
एसडीपीओ ने क्या कहा?
दाउदनगर एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि जैसे ही घटना की सूचना मिली, हसपुरा थानाध्यक्ष से बात की गई। चौकीदार को गांव भेजा गया था, लेकिन ग्रामीणों ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया। मामला नोटिस में है और इसकी जांच की जा रही है।
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