किसी की मृत्यु के बाद उसकी जमीन, बैंक का पैसा या पेंशन क्लेम करने के लिए उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज होता है। इसके बिना बैंक खाता, जमीन का नामांतरण या बीमा का पैसा आपके नाम नहीं हो सकता।
इस आर्टिकल में जानिए बिहार में उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र कैसे बनवाएं, कौन से दस्तावेज लगेंगे और कितने दिन में सर्टिफिकेट मिलेगा।
उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र क्या होता है?
उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र (Legal Heir Certificate) एक सरकारी दस्तावेज है, जो यह प्रमाणित करता है कि मृतक व्यक्ति के कानूनी वारिस कौन-कौन हैं। इसमें पति या पत्नी, बेटे-बेटियां, माता-पिता जैसे सभी जीवित वारिसों के नाम दर्ज होते हैं।
यह प्रमाण पत्र संपत्ति के बंटवारे, बैंक जमा राशि के दावे, बीमा की रकम, पेंशन और ग्रेच्युटी पाने के लिए मांगा जाता है। अगर मृतक सरकारी कर्मचारी थे, तो उनके बकाया वेतन या अनुकंपा से जुड़े कामों में भी यही प्रमाण पत्र लगता है।
कब-कब जरूरत पड़ती है?

- मृतक की जमीन या मकान अपने नाम कराने (नामांतरण) के लिए
- बैंक खाते, FD या लॉकर का पैसा निकालने के लिए
- बीमा कंपनी से क्लेम लेने के लिए
- पेंशन या पारिवारिक पेंशन शुरू कराने के लिए
- मृतक के बकाया वेतन या भत्तों के दावे के लिए
मृत्यु से जुड़े किसी भी क्लेम से पहले मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने का तरीका भी जान लें, क्योंकि यह सबसे पहला जरूरी दस्तावेज है।
जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट

आवेदन के साथ ये दस्तावेज लगाने होते हैं।
- मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र
- आवेदक और सभी जीवित वारिसों की पहचान का प्रमाण (आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड में से कोई एक)
- सभी वारिसों के पते का प्रमाण (आधार कार्ड, राशन कार्ड, बिजली बिल आदि)
- सभी वारिसों की जन्म तिथि का प्रमाण (जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल सर्टिफिकेट या पैन कार्ड)
- मृतक के पते का प्रमाण
- स्व-घोषणा पत्र या शपथ पत्र (self-declaration/affidavit)
- आवेदक और सभी वारिसों की पासपोर्ट साइज फोटो
- सभी वारिसों के नाम-पते की सूची
प्रमाण पत्रों से जुड़े दस्तावेजों की पूरी जानकारी RTPS दस्तावेज सूची में भी देख सकते हैं।
बिहार में आवेदन कैसे करें?

स्टेप 1। अपने अंचल (Circle) कार्यालय जाएं या राज्य के सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन का विकल्प देखें।
स्टेप 2। उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र का आवेदन फॉर्म भरें और सभी वारिसों के नाम सही-सही दर्ज करें।
स्टेप 3। ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज फॉर्म के साथ लगाएं या अपलोड करें।
स्टेप 4। आवेदन राजस्व अधिकारियों के पास सत्यापन के लिए भेजा जाता है। जरूरत पड़ने पर हल्का कर्मचारी या राजस्व निरीक्षक जांच भी कर सकते हैं।
स्टेप 5। सत्यापन पूरा होने के बाद प्रमाण पत्र जारी कर दिया जाता है। पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 30 दिन लग सकते हैं।
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें

फॉर्म में सभी जीवित वारिसों के नाम जरूर लिखें। किसी एक वारिस का नाम छूट जाने पर बाद में विवाद हो सकता है और प्रमाण पत्र दोबारा बनवाना पड़ सकता है। अगर वारिस 4 से ज्यादा हैं, तो निर्धारित प्रारूप में पूरी सूची अलग से लगाएं।
मृतक की पेंशन या पारिवारिक पेंशन के क्लेम के लिए पेंशन DBT चेक करने का तरीका भी जानना आपके काम आएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: क्या कोई एक वारिस अकेले आवेदन कर सकता है?
जवाब: हां, कोई एक वारिस आवेदन कर सकता है, लेकिन फॉर्म में सभी जीवित वारिसों के नाम दर्ज करने होंगे।
सवाल: प्रमाण पत्र बनने में कितना समय लगता है?
जवाब: सत्यापन सहित पूरी प्रक्रिया में आमतौर पर करीब 30 दिन लग जाते हैं।
सवाल: क्या मृत्यु प्रमाण पत्र के बिना आवेदन हो सकता है?
जवाब: नहीं। मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र सबसे जरूरी दस्तावेज है, इसके बिना आवेदन स्वीकार नहीं होगा।
सवाल: जमीन के कागज में नाम चढ़ाने के लिए क्या यही प्रमाण पत्र चलेगा?
जवाब: हां। दाखिल-खारिज और नामांतरण के लिए उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र ही मुख्य दस्तावेज होता है।
सवाल: अगर वारिसों में विवाद हो तो क्या होगा?
जवाब: विवाद की स्थिति में मामला राजस्व अधिकारियों के पास जाता है और दोनों पक्षों को सुनने के बाद फैसला होता है।
सवाल: क्या यह प्रमाण पत्र पूरे भारत में मान्य है?
जवाब: हां, जारी करने वाले प्राधिकारी की मुहर के साथ यह प्रमाण पत्र हर जगह मान्य होता है।
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