Shapath Patra, जिसे affidavit भी कहा जाता है, एक लिखित घोषणा है जो किसी विशेष काम के लिए या उसके खिलाफ की जाती है। यह अक्सर सरकारी और गैर-सरकारी कार्यों में महत्वपूर्ण होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं, Shapath Patra के कितने प्रकार होते हैं और इसे कैसे तैयार किया जाता है? आइए, इसे सरल भाषा में समझते हैं।
Shapath Patra क्या होता है और इसे कहां इस्तेमाल किया जाता है?
Shapath Patra एक लिखित बयान होता है जो duty officer या commissioner के सामने दिया जाता है। इसे अदालत, सरकारी प्रमाण पत्र जैसे जन्म प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, या राशन कार्ड बनवाने के लिए प्रयोग किया जाता है। यह सत्य और सटीक जानकारी पर आधारित होना चाहिए। यदि इसमें गलत जानकारी दी गई हो, तो संबंधित काम रद्द किया जा सकता है।
Shapath Patra के प्रकार क्या होते हैं?
Shapath Patra तीन प्रकार के होते हैं:
- सामान्य उपयोग के लिए: जैसे प्रमाण पत्र बनवाने या निजी कार्यालयों में।
- अदालत में प्रस्तुत करने के लिए: जैसे गवाही या सिविल केस में।
- उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर करने के लिए: इसमें सभी जानकारी सटीक और सख्त प्रावधानों के तहत होनी चाहिए।
Shapath Patra में सत्यता और प्रक्रिया का महत्व।
Shapath Patra में दी गई जानकारी पूर्णत: सत्य होनी चाहिए। अगर गलत जानकारी के साथ इसे अदालत में पेश किया गया, तो संबंधित व्यक्ति पर धारा 340 CrPC और धारा 193 IPC के तहत कार्रवाई हो सकती है।
Shapath Patra की लागत और इसकी भाषा।
Shapath Patra पर लगने वाली स्टांप ड्यूटी इसके प्रकार पर निर्भर करती है। अदालत में पेश किए जाने वाले Shapath Patra पर स्टांप पेपर की आवश्यकता नहीं होती, लेकिन इसे notary officer या oath commissioner से सत्यापित करना जरूरी होता है। यह पत्र आमतौर पर हिंदी और अंग्रेजी में तैयार किया जाता है।
Shapath Patra को सत्यापित कैसे कराएं?
Shapath Patra को सत्यापित कराने के लिए पहले इसे तैयार कराना होता है। यदि यह किसी प्रमाण पत्र के लिए है, तो इसे notary officer से सत्यापित कराना चाहिए। अदालत में प्रस्तुत किए जाने वाले Shapath Patra को oath commissioner से सत्यापित करना आवश्यक है।
Shapath Patra से जुड़े किसी अन्य सवाल के लिए, आप विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं। उम्मीद है, यह लेख आपको Shapath Patra की प्रक्रिया और महत्व को समझने में मदद करेगा।
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