Last Updated: 29 अक्टूबर 2026
रबी की बुआई सिर पर है और गेहूं बोने से पहले हर किसान को Urea और DAP चाहिए। अगर दुकानदार बोरी पर छपे सरकारी दाम से ज़्यादा पैसे मांगे, खाद होते हुए भी ना दे या किसी और सामान के साथ खाद लेने पर मजबूर करे, तो चुप मत बैठिए। ऐसी हर हरकत की शिकायत आप अपने प्रखंड कृषि पदाधिकारी और ज़िला कृषि कार्यालय में कर सकते हैं, और शिकायत के साथ आपकी खरीद की Receipt सबसे मज़बूत सबूत होती है। कृषि निदेशालय, बिहार ने 23 अक्टूबर 2026 को पत्रांक 2158 जारी करके रबी 2026-27 में खाद की कालाबाज़ारी, जमाखोरी और Tagging पर सभी ज़िला पदाधिकारियों को संयुक्त टीम से छापेमारी का आदेश दिया है। इस गाइड में हम आपको सरकारी दाम, खरीद की सही प्रक्रिया और शिकायत का पूरा रास्ता कदम दर कदम बता रहे हैं।
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Quick Links
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एक नज़र में पूरी बात
| बात | जानकारी |
|---|---|
| समस्या | रबी सीज़न में Urea और DAP का ज़्यादा दाम, जमाखोरी, कालाबाज़ारी और Tagging |
| Urea का सरकारी दाम | 45 किलो की बोरी पर MRP ₹242, इसके अलावा नीम कोटिंग शुल्क और लागू कर अलग से लग सकता है। बोरी पर छपी MRP ही अंतिम सबूत है। |
| DAP का दाम | 50 किलो की बोरी का दाम ₹1,350 पर बनाए रखा गया है। बोरी पर छपी MRP ज़रूर देखें। |
| विभाग का आदेश | कृषि निदेशालय का पत्रांक 2158, दिनांक 23 अक्टूबर 2026, सभी ज़िला पदाधिकारियों को संयुक्त छापेमारी और निगरानी का निर्देश |
| शिकायत कहाँ करें | प्रखंड कृषि पदाधिकारी, ज़िला कृषि कार्यालय और ज़िला पदाधिकारी की संयुक्त जांच टीम |
| सबसे ज़रूरी सबूत | खरीद की Receipt, बोरी पर छपी MRP की तस्वीर और दुकान का नाम व जगह |
कृषि निदेशालय का 23 अक्टूबर वाला पत्र क्या कहता है?
कृषि निदेशक मुकेश कुमार लाल की ओर से जारी पत्रांक 2158 (उ०भो०-17) का विषय रबी 2026-27 में उर्वरकों की उपलब्धता, वितरण और विचलन की रोकथाम है। पत्र में साफ लिखा है कि राज्य में खाद की पर्याप्त उपलब्धता है, इसलिए किसान घबराकर ज़रूरत से ज़्यादा खरीदारी न करें। पत्र के मुख्य निर्देश ये हैं।
- हर ज़िले में प्रशासन, कृषि विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम बनेगी, जो जमाखोरी और कालाबाज़ारी पर नियमित निरीक्षण और छापेमारी करेगी।
- अनुदानित Urea और DAP के साथ किसी और उत्पाद की Tagging बिल्कुल नहीं होगी। उल्लंघन पर प्राथमिकी दर्ज करके कड़ी कार्रवाई होगी।
- अनुदानित खाद का औद्योगिक कामों में उपयोग और सीमावर्ती ज़िलों से अवैध परिवहन पर विशेष निगरानी रहेगी।
- 26 ज़िलों में, जहाँ पिछले वर्ष की तुलना में DAP की खपत में असामान्य बढ़ोतरी देखी गई है, विशेष निगरानी रखी जाएगी। इनमें पटना, भोजपुर, बक्सर, सारण, गोपालगंज, सिवान, मुंगेर, भागलपुर की ओर के ज़िले और सीमांचल व मिथिला के कई ज़िले शामिल हैं।
- DAP पर निर्भरता घटाने के लिए NPK और SSP के उपयोग को बढ़ावा दिया जाएगा, ताकि संतुलित उर्वरक उपयोग हो।
इसका सीधा मतलब है कि अगर आपके इलाके में कोई दुकानदार मनमानी कर रहा है, तो विभाग पहले से कार्रवाई के मोर्चे पर है। आपकी एक लिखित शिकायत उसी टीम के काम आती है।
Urea और DAP का सरकारी दाम कितना है?
सबसे पहले यह जान लीजिए कि आपको देना कितना चाहिए, तभी आप पहचान पाएंगे कि ज़्यादा वसूली हो रही है या नहीं।
| खाद | बोरी | किसान को देय दाम | ध्यान दें |
|---|---|---|---|
| Urea (नीम लेपित) | 45 किलो | MRP ₹242 | नीम कोटिंग शुल्क और लागू कर अलग से लग सकता है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यह MRP मार्च 2018 से नहीं बदला है। |
| DAP | 50 किलो | ₹1,350 | सरकार ने विशेष सहायता से यह दाम बनाए रखा है। बोरी पर छपी MRP से एक रुपया भी ज़्यादा न दें। |
एक बात हमेशा याद रखिए। बोरी पर छपी हुई MRP ही कानूनन दाम है। दुकानदार परिवहन, मज़दूरी या कमीशन के नाम पर ऊपर से पैसे नहीं जोड़ सकता। अगर बोरी पर छपा दाम और मांगा गया दाम अलग है, तो वही आपकी शिकायत की बुनियाद है। बोरी की तस्वीर अपने फोन में ज़रूर ले लीजिए, जिसमें MRP साफ दिखे।
खाद खरीदते समय ये 5 सावधानियां बरतें
1. बिक्री की नई प्रक्रिया समझ लीजिए
23 अक्टूबर के पत्र में एक बड़ा बदलाव है। इस बार ज़िलों में किसानों को खाद की बिक्री FSAS व्यवस्था से होगी और बिक्री पुरानी POS मशीन की जगह बनाए गए वैध QR Code के माध्यम से सुनिश्चित करने को कहा गया है। दुकान पर QR Code से आपकी पहचान और खरीद दर्ज होगी, इसलिए खरीद हमेशा इसी दर्ज प्रक्रिया से करें। बिना दर्ज किए नकद में खाद लेना बाद में आपके ही खिलाफ जाता है, क्योंकि आपके पास खरीद का कोई सरकारी रिकॉर्ड नहीं बचता।
2. Receipt हर हाल में लीजिए
खरीद की Receipt या पर्ची लेना आपका हक है। Receipt पर दुकान का नाम, तारीख, खाद का नाम, बोरी की संख्या और दिया गया दाम लिखा होता है। यही पर्ची तीन जगह काम आती है। पहला, ज़्यादा दाम की शिकायत में यह सबसे पक्का सबूत है। दूसरा, अनुदानित खाद की खरीद का रिकॉर्ड इसी से बनता है, और बिना रिकॉर्ड वाली खरीद पर आगे चलकर अनुदान और योजना संबंधी जांच में दिक्कत आ सकती है। तीसरा, अगर खाद खराब या कम तौल की निकले, तो वापसी और कार्रवाई का आधार यही पर्ची है। दुकानदार पर्ची देने से मना करे, तो यह बात भी शिकायत में लिखिए।
3. Tagging को साफ मना कीजिए
दुकानदार कहे कि DAP के साथ फलां दवा, बीज या कोई और सामान लेना ही पड़ेगा, तो यह Tagging है और विभाग ने इस पर प्राथमिकी तक का आदेश दिया है। आपको सिर्फ वही खरीदना है, जो आपकी फसल को चाहिए। Tagging पर मजबूर किया जाए तो दुकान का नाम नोट करके शिकायत कीजिए।
4. ज़रूरत से ज़्यादा मत खरीदिए
विभाग ने खुद कहा है कि खाद पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है और आपूर्ति लगातार हो रही है। अफवाह में आकर चार बोरी की जगह आठ बोरी उठा लेने से आपके पैसे फंसते हैं और गाँव के दूसरे किसान को कमी पड़ती है। मिट्टी और फसल की असली ज़रूरत के हिसाब से ही खरीदें।
5. आधार और किसान पंजीकरण साथ रखिए
दर्ज बिक्री के लिए आपकी पहचान ज़रूरी होती है। आधार कार्ड और किसान पंजीकरण से जुड़ी जानकारी साथ रखें, ताकि दुकान पर आपकी खरीद बिना रुकावट दर्ज हो सके। रबी के इसी समय पर बीज की तैयारी भी चल रही है, इसलिए बीज अनुदान योजना की गाइड भी साथ में देख लीजिए।
शिकायत हमेशा लिखित में दीजिए और उसकी प्राप्ति रसीद लीजिए, ताकि आपकी बात रिकॉर्ड में रहे।
ज़्यादा दाम मांगे या Stock होते हुए खाद न मिले तो क्या करें?
मान लीजिए आप दुकान गए, बोरी पर ₹242 की MRP छपी है और दुकानदार ₹320 मांग रहा है, या कह रहा है कि खाद खत्म है, जबकि गोदाम में बोरी दिख रही है। ऐसी हालत में ये कदम क्रम से अपनाइए।
- पहले सबूत इकट्ठा कीजिए। बोरी पर छपी MRP की तस्वीर, दुकान के नाम बोर्ड की तस्वीर और हो सके तो मांगे गए दाम की बातचीत का समय नोट कीजिए। अगर खरीद हो चुकी है तो Receipt संभालकर रखिए।
- दुकानदार को नियम बताइए। कई बार सिर्फ इतना कह देना काफी होता है कि दाम बोरी पर छपी MRP से ज़्यादा नहीं लिया जा सकता और इसकी शिकायत कृषि विभाग में होती है।
- प्रखंड कृषि पदाधिकारी को बताइए। आपके प्रखंड में बैठने वाले कृषि पदाधिकारी इस काम के सबसे नज़दीकी अधिकारी हैं। उनसे मिलकर लिखित शिकायत दीजिए और प्राप्ति पर हस्ताक्षर या मोहर वाली प्रति लीजिए।
- ज़िला कृषि कार्यालय में शिकायत दीजिए। बात न बने तो ज़िला कृषि पदाधिकारी के कार्यालय में वही लिखित शिकायत Receipt और तस्वीरों के साथ दीजिए। 23 अक्टूबर के आदेश के बाद ज़िला स्तर पर संयुक्त जांच टीम बनी हुई है, जो ऐसी शिकायतों पर छापेमारी करती है।
- शिकायत का पीछा कीजिए। शिकायत की प्रति अपने पास रखिए और एक हफ्ते में कार्यालय जाकर पूछिए कि कार्रवाई क्या हुई। लिखित शिकायत का रिकॉर्ड रहता है, इसलिए मौखिक शिकायत पर ही न रुकें।
शिकायत में ये बातें साफ लिखिए। अपना नाम, गाँव और प्रखंड, दुकान का नाम और जगह, तारीख, खाद का नाम, बोरी पर छपी MRP और मांगा गया दाम, और साथ में Receipt की प्रति। आधी अधूरी शिकायत पर कार्रवाई धीमी होती है, पूरी जानकारी वाली शिकायत पर टीम तुरंत निकलती है।
शिकायत कहाँ करें, पूरा रास्ता
| स्तर | कहाँ जाएं | कब जाएं |
|---|---|---|
| पहला स्तर | प्रखंड कृषि पदाधिकारी | हर छोटी बड़ी शिकायत की शुरुआत यहीं से कीजिए। यही अधिकारी आपके इलाके की दुकानों की निगरानी करता है। |
| दूसरा स्तर | ज़िला कृषि कार्यालय, ज़िला कृषि पदाधिकारी | प्रखंड से हल न निकले, या मामला बड़े गोदाम और थोक विक्रेता का हो। |
| तीसरा स्तर | ज़िला पदाधिकारी कार्यालय की संयुक्त जांच टीम | जमाखोरी और कालाबाज़ारी के बड़े मामले में, क्योंकि छापेमारी का आदेश इसी स्तर से चलता है। |
| जानकारी के लिए | कृषि विभाग, बिहार की आधिकारिक वेबसाइट | विभाग की घोषणाएं, कार्यालयों की जानकारी और ताज़ा निर्देश देखने के लिए। |
एक ज़रूरी सलाह। फोन पर शिकायत के लिए अपने ज़िला कृषि कार्यालय से विभागीय नियंत्रण कक्ष का ताज़ा नंबर वहीं से लीजिए, क्योंकि नंबर समय समय पर बदलते रहते हैं और गलत नंबर पर की गई शिकायत कहीं नहीं पहुँचती। कार्यालय जाना सबसे भरोसेमंद रास्ता है, वहाँ आपकी शिकायत लिखित रिकॉर्ड में आ जाती है। फसल नुकसान की स्थिति में मिलने वाली सहायता की जानकारी के लिए कृषि इनपुट अनुदान की पूरी गाइड भी पढ़ लीजिए।
गेहूं बुआई का समय और खाद की योजना
बिहार में गेहूं की बुआई का मुख्य समय नवंबर का महीना होता है। बुआई के समय DAP की ज़रूरत सबसे ज़्यादा पड़ती है, क्योंकि जड़ की मज़बूती के लिए फॉस्फोरस बुआई के साथ ही दिया जाता है, और Urea की पहली खुराक बुआई के करीब तीन हफ्ते बाद सिंचाई के साथ जाती है। इसीलिए हर साल नवंबर की शुरुआत में दुकानों पर भीड़ बढ़ती है और इसी भीड़ का फायदा उठाकर कुछ लोग मनमाना दाम वसूलते हैं।
समझदारी इसी में है कि बुआई से एक हफ्ता पहले ही अपनी DAP की व्यवस्था कर लीजिए और Urea की खरीद सिंचाई के समय के हिसाब से कीजिए। विभाग ने DAP की जगह NPK और SSP को भी संतुलित विकल्प बताया है, इसलिए किसी दुकान पर DAP की अस्थायी कमी हो तो कृषि पदाधिकारी से पूछकर सही विकल्प अपनाइए, घबराकर ऊंचे दाम पर मत खरीदिए। रबी के खर्च के लिए सस्ते लोन की जानकारी चाहिए तो किसान क्रेडिट कार्ड रबी लोन गाइड आपके काम की है, और किस्त की जानकारी के लिए PM Kisan 24वीं किस्त का Status भी देख लीजिए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
Urea की 45 किलो बोरी का सरकारी दाम कितना है?
केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी के अनुसार नीम लेपित Urea की 45 किलो बोरी की MRP ₹242 है, जो मार्च 2018 से नहीं बदली है। इसके ऊपर नीम कोटिंग शुल्क और लागू कर अलग से लग सकता है। अंतिम सबूत बोरी पर छपी MRP है, उससे ज़्यादा देना आपका नुकसान है और शिकायत का आधार है।
DAP की 50 किलो बोरी कितने की मिलनी चाहिए?
DAP की 50 किलो बोरी का दाम ₹1,350 पर बनाए रखा गया है। दुकानदार इससे ज़्यादा मांगे तो बोरी पर छपी MRP दिखाइए और फिर भी न माने तो प्रखंड कृषि पदाधिकारी के पास शिकायत कीजिए।
गाँव में लोग पूछते हैं कि khaad sikayat kahan karein, सबसे आसान रास्ता क्या है?
सबसे आसान और असरदार रास्ता लिखित शिकायत है। अपनी Receipt और बोरी की MRP वाली तस्वीर के साथ प्रखंड कृषि पदाधिकारी को शिकायत दीजिए। बात वहाँ न बने तो ज़िला कृषि कार्यालय जाइए, जहाँ संयुक्त जांच टीम आपकी शिकायत पर छापेमारी तक कर सकती है।
खरीद की Receipt लेना क्यों ज़रूरी है?
Receipt ही आपकी खरीद का सरकारी और कानूनी सबूत है। ज़्यादा दाम की शिकायत, अनुदानित खाद के रिकॉर्ड और खराब खाद की वापसी, तीनों में यही पर्ची काम आती है। बिना Receipt के दुकानदार बाद में खरीद से भी इनकार कर सकता है।
दुकानदार खाद के साथ दूसरा सामान लेने पर मजबूर करे तो क्या करें?
यह Tagging है। कृषि निदेशालय के 23 अक्टूबर 2026 के पत्र में Tagging पर प्राथमिकी दर्ज करने तक का निर्देश है। सामान लेने से मना कीजिए, दुकान का नाम और तारीख नोट कीजिए और कृषि पदाधिकारी को शिकायत दीजिए।
POS मशीन की जगह QR Code से बिक्री क्यों हो रही है?
23 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार इस बार बिक्री FSAS व्यवस्था से वैध QR Code के माध्यम से सुनिश्चित करने का निर्देश है, ताकि हर खरीद सही किसान के नाम पर दर्ज हो और खाद का विचलन रुके। यह बदलाव आपके हित में है, क्योंकि आपकी खरीद का रिकॉर्ड और मज़बूत बनता है।
स्रोत: कृषि निदेशालय, बिहार का पत्रांक 2158 (उ०भो०-17), दिनांक 23 अक्टूबर 2026, और PIB पर जारी केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी तथा कृषि विभाग, बिहार की आधिकारिक वेबसाइट। दाम और नियम समय समय पर बदल सकते हैं, खरीद से पहले बोरी पर छपी MRP और विभाग की ताज़ा घोषणा ज़रूर देख लें।





