Sonpur Mela 2026 kab se hai, यह सवाल कार्तिक का महीना आते ही पूरे बिहार में पूछा जाने लगता है। विश्वप्रसिद्ध हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु मेला है, जो हर साल गंगा और गंडक के संगम पर, सारण जिले के सोनपुर में लगता है। इस बार मेले की तारीखें घोषित हो चुकी हैं और तैयारियां ज़ोरों पर हैं। इस लेख में मेले की पूरी जानकारी दी गई है, कब से कब तक चलेगा, इस बार क्या खास है, मेले में क्या क्या देखने को मिलेगा और सोनपुर कैसे पहुंचे।
Last Updated: 4 November 2026
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एक नज़र में: Sonpur Mela 2026
| मेला शुरू | 22 November 2026 (कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर भव्य उद्घाटन) |
| मेला समाप्त | 23 December 2026 |
| कुल अवधि | 32 दिन |
| स्थान | सोनपुर, जिला सारण, गंगा और गंडक नदी का संगम |
| आयोजन | पर्यटन विभाग, बिहार सरकार और जिला प्रशासन सारण |
| मुख्य आकर्षण | पशु बाज़ार, महाआरती, रामायण मंचन, नौका दौड़, दंगल, सांस्कृतिक संध्या, ग्रामश्री मंडप |
| प्रवेश | मेला क्षेत्र में घूमना आमतौर पर मुफ्त रहता है, झूले और कार्यक्रमों के अलग शुल्क हो सकते हैं |
इस बार Sonpur Mela 2026 में क्या खास है?
इस बार प्रशासन ने मेले को पहले से ज़्यादा भव्य और व्यवस्थित बनाने की तैयारी की है। गंडक नदी के तट पर नियमित महाआरती होगी, भव्य रामलीला और भागवत कथा का आयोजन होगा और लगातार सात दिनों तक रामायण का मंचन होगा, जिसके लिए LED screen की व्यवस्था की जा रही है। ऐतिहासिक नौका दौड़, पारंपरिक कुश्ती दंगल और पतंगबाजी की प्रतियोगिताएं भी इस बार के कार्यक्रमों में शामिल हैं।
हर शाम सांस्कृतिक संध्या होगी, जिसमें Bollywood, Indian Idol, Sa Re Ga Ma Pa और Rising Star जैसे मंचों से जुड़े चर्चित गायक, Bhojpuri कलाकार, लोकगायक और शास्त्रीय संगीत व नृत्य की मंडलियां प्रस्तुति देंगी। सुरक्षा के लिए इस बार drone से निगरानी होगी और मेले के 20 संवेदनशील स्थानों पर 250 से अधिक CCTV camera लगाए जाएंगे। सफाई के लिए पूरा मेला क्षेत्र 2 zone और 10 sub zone में बांटा गया है और मुख्य स्नान के बाद 24 घंटे के भीतर घाटों की सफाई की योजना है।
महिलाओं और ग्रामीण कारीगरों के लिए इस बार खास इंतज़ाम है। Jeevika didiyon और ग्रामीण शिल्पकारों के उत्पादों के लिए 8,000 वर्गफीट का waterproof ग्रामश्री मंडप बनाया जाएगा। स्वास्थ्य के लिए मेले में अस्थायी शिविर और औषधालय रहेंगे और ambulance की व्यवस्था के लिए प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है।
मेले में क्या क्या देखने को मिलेगा?
सोनपुर मेले की पहचान उसका पशु बाज़ार है। यहां घोड़ों का बाज़ार, यानी घोड़ा हाट, सबसे प्रसिद्ध है, जहां दूर दूर से अच्छी नस्ल के घोड़े आते हैं। गाय, भैंस और दूसरे पशुओं के साथ कुत्तों और पक्षियों का बाज़ार भी लगता है। हाथियों को लेकर एक बात साफ समझ लें, 2004 से हाथियों की खरीद बिक्री पर कानूनी रोक है, लेकिन सजे हुए हाथी मेले में प्रदर्शन और आकर्षण के लिए आते हैं और संगम पर हाथियों का स्नान आज भी मेले की सबसे प्रसिद्ध तस्वीर है।
धार्मिक महत्व भी उतना ही बड़ा है। कार्तिक पूर्णिमा पर लाखों श्रद्धालु गंगा गंडक संगम में स्नान करते हैं और हरिहर नाथ मंदिर में दर्शन करते हैं। मान्यता है कि यही वह भूमि है जहां गजेंद्र मोक्ष की कथा हुई थी, जब भगवान विष्णु ने हाथी गजेंद्र को मगरमच्छ से बचाया था। मेले में इसके अलावा झूले, circus, nautanki, जादू के खेल और बड़ा बाज़ार रहता है, जहां हस्तशिल्प, गर्म कपड़े, खेती के औज़ार और घरेलू सामान मिलता है। खाने में litti chokha, malpua और jalebi की दुकानों पर सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है।
Sonpur Mela का इतिहास
सोनपुर मेले का इतिहास हज़ारों साल पुराना माना जाता है। प्राचीन काल से यहां पशुओं का व्यापार होता आया है और एक समय यहां युद्ध के लिए हाथी खरीदे जाते थे। मेले का एक राजनीतिक अध्याय भी है, वर्ष 1929 में बिहार राज्य किसान सभा की स्थापना सोनपुर मेले में ही हुई थी, जहां किसानों ने अपने हक़ की आवाज़ बुलंद की थी। धीरे धीरे पशु व्यापार का आकार बदला, लेकिन मेले का स्वरूप धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और व्यापार का संगम बनकर और बड़ा हो गया।
Sonpur Mela कैसे पहुंचे?
Train से: सोनपुर का अपना railway station है, Sonpur Junction, जो Patna, Hajipur, Muzaffarpur और देश के बड़े शहरों से सीधा जुड़ा है। मेले के दिनों में इस route पर भीड़ ज़्यादा रहती है, इसलिए ticket पहले से लेना सही रहता है।
सड़क मार्ग से: Patna से सोनपुर लगभग 25 से 30 किलोमीटर दूर है। Mahatma Gandhi Setu या J.P. Setu पार करके Hajipur पहुंचें, वहां से auto और bus सोनपुर के लिए आसानी से मिलते हैं। Chhapra और Saran की तरफ से आने वालों के लिए सोनपुर सीधा पड़ता है।
हवाई मार्ग से: सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा Patna Airport है, जो सोनपुर से लगभग 30 किलोमीटर दूर है। वहां से taxi लेकर सीधे मेले तक पहुंचा जा सकता है।
जाने से पहले ये बातें ध्यान रखें
कार्तिक पूर्णिमा के दिन और रविवार को मेले में सबसे ज़्यादा भीड़ रहती है, उस दिन संगम स्नान के लिए सुबह जल्दी जाना ही सही रहता है। मेला घूमने का सबसे अच्छा बंटवारा यह है कि सुबह स्नान और दर्शन कर लें और शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लें, रात में रोशनी से सजा मेला अलग ही दिखता है। भीड़ में बच्चों और बुजुर्गों का खास ध्यान रखें और जेबकतरों से सावधान रहें। पशु खरीदने जा रहे किसान भाई खरीद की रसीद और कागज़ ज़रूर लें और पशु की सेहत की जांच किसी जानकार से कराकर ही सौदा करें।
वहां गए लोगों के अनुभवों के अनुसार मेले का असली रंग शाम के बाद दिखता है, जब झूले, रोशनी और सांस्कृतिक मंच एक साथ जीवंत हो उठते हैं। खाने के stalls पर स्थानीय स्वाद ज़रूर आज़माएं, लेकिन पानी और खाने की सफाई का ध्यान रखें।
आखिरी बात
Sonpur Mela 2026 इस बार 22 November से 23 December तक पूरे 32 दिन चलेगा। धार्मिक आस्था, एशिया का सबसे बड़ा पशु बाज़ार, महाआरती, रामायण मंचन और हर शाम सितारों की सांस्कृतिक संध्या, इस बार का मेला हर उम्र के लोगों के लिए कुछ न कुछ लेकर आ रहा है। योजना पहले से बना लें, तारीख note कर लें और हो सके तो एक दिन सुबह के स्नान और एक शाम के कार्यक्रमों के लिए ज़रूर निकालें।
Photo: सोनपुर मेले में संगम पर स्नान करते हाथी, Wikimedia Commons, CC0
Source: Dainik Jagran (September और October 2026 की सोनपुर मेला रिपोर्ट), जिला प्रशासन सारण की घोषित तारीखें और मेले के video अनुभव।





